कैसे पता करें कि आपके दांतों में कीड़ा है या नहीं

गुहा( कैविटी) क्या होती है ?
कैविटी वह होती है जो आपको दांतों की गंदगी ( सडन) से होती है दांतों को होने वाली  छति नुकसान (सडन ) दांतों की बाहरी परत (जिसे हम एनिमल कहते हैं ) भीतरी  (अंदर) की परत (जिसे हम डेटिंग कहते हैं ) को प्रभावित करती है उसे  नुकसान पहुंचती है ।

कैविटी (कीड़ा ) के संकेत और लक्षण : -

कैविटी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि यह कितनी बड़ी है और आपके मुंह में कहां है हो सकता है कि आपको शुरुआत में इसकी कोई भी लक्षण न दिखाई दे जैसे-जैसे कैविटी की समस्या बड़ी होती जाएगी ऐसे ही ऐसे इसके लक्षण और जाति में कठोर होते जाएंगे जिनमें शामिल है : - 

• बिना किसी संकट या चेतावनी के होने वाला दर्द ,दांत का दर्द ।
• संवेदनशील दांत ।
• मीठा ठंडा गरम खाने पर दांतों में लगना या महसूस होना ।
• आपके डाढ़ या दांत में गड्ढे या छेद होना ।
• दांतों पर काले  या  भूरे सफेद दाग होना ।
जब आप खाना खाते या चबाते हैं तो दर्द होता है

कैविटी (कीड़ा )के जोखिम कारक एवं कारण : -

जब कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थ आपके दांतों पर रहते हैं जैसे ब्रेड , अनाज, दूध , फल ,केक , कैंडी , दांतों पर रहते हैं तो वे  प्लाक उत्पन्न करते हैं । आपके मुंह में उत्पन्न बैक्टीरिया उन्हें कीड़ा में बदल देते हैं । बैक्टीरिया और खाने के बच्चे अंश दांतों की सतह पर जम जाते हैं और उन्हें बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन करते हैं जो सदन का कारण बनते हैं जिससे डाढ़ और हमारे दांतों में कीड़ा लग जाता है ।

 कैविटीज़ के लिए जोखिम कारक

१.प्लाक
२. टार्टर
३. दांतों की सतह में डिफेक्ट होना
४. मीठी या एसिडिक चीज खाना
५. दांतों में बहुत कम क्लोराइड होना , लार कम बनना

कैविटीज़ का  इलाज ( Treatment of cavities )

• दांतों की डॉक्टर के द्वारा जांच कराई जाए ।
 कभी-कभी दांतों का एक्सरे करके भी डॉक्टर को दिखाया जाए ।

अगर दर्द होने से पहले ही कैविटी का इलाज कर दिया जाता है तो पल्प को नुकसान होने की संभावना कम हो जाती है और दांत की संरचना का काफी हिस्सा बच जाता है समय रहते कैविटीज का पता लगने के लिए डॉक्टर को  दर्द के बारे में पूछते हैं दांतों की जांच करते हैं दांतों के औजार के साथ दांतों की जांच करते हैं और जरूरत पड़ने पर एक्स-रे भी ले सकते हैं कुछ दांतों के डॉक्टर खास तरह की दी फाइबरऑप्टिक लाइट और या/ ऐसे नए डिवाइसों का भी उपयोग करते हैं जो इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी या लेजर , रिफ्लेक्टिविटी में परिवर्तन द्वारा कैविटीज का पता लगाते हैं ।

रोगों को अपने दांतों की कैविटीज की संवेदनशीलता और अपने दांतों के डॉक्टर की सलाह के आधार पर हर 3 से 12 महीने में दांतों की जांच करानी चाहिए और हर जांच में एक्शन नहीं किए जाते लेकिन कैविटीज यहां तक की मौजूदा रेस्टोरेशन वाली का पता लगाने और उन कैविटीज की गहराई को जांचने के लिए एक्स -रे की जरूरत पड़ सकती है दांतों का आकलन करके दांतों के डॉक्टर यह भी तय करते हैं कि एक से कितनी बार किया जाना चाहिए जिन लोगों में नहीं कैविटी होने का जोखिम कम है उन लोगों की जांच कम की जाती है ।

फिलिंग्स ( material )

फीलिंग अलग-अलग मटेरियल से बनी होती है और इन्हें दांत के अंदर या उसके आसपास लगाया जाता है जिससे उसे कीड़े लगे हुए गड्ढे में हमारे खान-पान की चीज ना जाए ।
 
सिल्वर  एमलगम ( silver amlagam )

चांदी, पारा, टिन और कभी-कभी जस्ता, , या इंडियन , कॉन्बिनेशन का उपयोग करके आमतौर पर पीछे के दांतों में भरने के लिए किया जाता है जहां ताकत की जरूरत होती है । और चांदी का रंग आसानी से नजर में नहीं आता सिल्वर एमलगम अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है और औसतन 14 साल तक रहता है हालांकि अगर रबर डैम का उपयोग करके एमलगम को सावधानी पूर्वक रखा जाए तो व्यक्ति अपने मुंह के साफ-सफाई ठीक रखें तो एमलगम 40 से ज्यादा वर्षों तक रह सकता है ।

क्योंकि लोग एम लगन के उपयोग से जुड़े स्वस्थ और पर्यावरणीय खतरों के बारे में चिंता जताने लगते हैं और उन्हें सौंदर्य की दृष्टि से कंपोजिट रेजिन ज्यादा आकर्षक लगने लगा हैक्योंकि एम लगाम का उपयोग घटने लगा है हालांकि सिल्वर वाले एम लगाम से निकली मरकरी की मात्रा बहुत कम होती है इसलिए स्वास्थ्य पर इसका कोई असर नहीं पड़ता क्योंकि एम लगाम को बदलने की प्रक्रिया महंगी पड़ती है दांत की संरचना को नुकसान पहुंचती है व्यक्ति के लिए मरकरी के खतरों को बढ़ाती है और मरकरी को वातावरण में जाने से बचानेऔर कंपोजिट रेसीन की तुलना में और कैविटीज होने के लिए ज्यादा मजबूती से बचाव करती है फिर भी इसके पर्यावरण में खतरों के बारे में चिटा के चलते एम लगाम के अलावा दांतों के इलाज के लिए दूसरे तरीकों को आजमाने का चलन बढ़ने लगा है आजकल युवाएं दूसरे तरीके को आजमाने लगे हैं ।

रूट कैनाल ट्रीटमेंट या दांत उखाड़ना ( एक्सट्रैक्शन )

जब दांतों की सदन पल्प को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचाने की हद तक पड़ जाती है तो रूट कैनाल ट्रीटमेंट या दांत उखाड़ कर बल्ब को निकालना ही दांत को खत्म करने का एकमात्र उपाय है

दांत को स सुन्न किया जाता है और मुंह के बाकी हिस्सों के बैक्टीरिया से इसे अलग करने के लिए दांत के चारों ओर एक रबर दम रखा जाता है इसके बाद एक पीछे के दांत की चबाने वाली सतह या जीभ की तरफ वाले एक सामने के दांत की सतह में भी ड्रिल किया जाता है ।

इसके बाद कैनाल को साफ किया जाता है और उसके खुले सिरे से लेकर जड़ के अंत तक खर्च जाता है बारीक औजारों को छेद में से होते हुए पल्प कैनाल वाली जगह में डाला जाता है और बच्चे सभी पाल को हटा दिया जाता है इसके बाद कैनाल को एक लचीले पदार्थ ( gutta Percha )से सील कर दिया जाता है ।

अगर दांत उखाड़ जाता है तो इसकी भरपाई करने के लिए जल्द से जल्द मूल्यांकन किया जाना चाहिए वरना उसके आस पड़ोस या सामने के दांतों की पोजीशन बदल सकती है और दांतों से कटने के तरीके में बदलाव आ सकता है उखाड़े गए दांतों की भरपाई के लिए विकल्प है ।

कैविटीज़ की रोकथाम ( stop the cavaties )

कैविटीज़ को रोकने के लिए कई सामान्य उपाय किए जाने जरूरी हैं

• मुंह की अच्छी साफ सफाई और दांतों को नियमित तरीके से साफ करना चाहिए ।

• स्वास्थ्यवर्धक आहार लेकर

•क्लोराइड लेकर (पानी टूथपेस्ट या दोनों के माध्यम से )

• कभी-कभी फ्लोराइड सीलेंट उपचार और एंटीबैक्टीरियल थेरेपी के माध्यम से ।

मुंह की साफ सफाई ( cleaning of mouth )

मुंह की अच्छी साफ सफाई रखना । जिसमें नाश्ते से पहले या बाद में और सोने से पहले ब्रश करना चाहिए चिकनी सतह की सदन को प्रभावित रूप से नियंत्रित किया जा सकता है ब्रश करने से दांतों के ऊपरी भाग और किनारो पर कैविटीज को बनने से रोकने में मदद मिलती है और फ्लैशिंग उन दांतों के बीच की जाती है जहां ब्रुश नहीं पहुंच पाते हैं ।

इलेक्ट्रिक और अल्ट्रासोनिक ट्रुथ ब्रश सबसे बेहतरीन होते हैं लेकिन एक आम टूथब्रश को ठीक से उपयोग करना काफी होता है आमतौर पर सही से ब्रश करने में केवल तीन से चार मिनट लगते हैं लोगों को बहुत ज्यादा टूथपेस्ट का उपयोग करने से बचना चाहिए खासतौर पर घिसने वाले जो दांतों को तबाह कर सकते हैं खासतौर पर अगर एसिडिक पर पीने के तुरंत बाद ब्रश किया जाता हैक्लास को धीरे-धीरे दांतों के बीच आगे पीछे किया जाता है इसके बाद इसे जबड़े की सतह पर अंग्रेजी के अक्षर सी के आकार में दांत और जड़ की सातों के चारों ओर घुमाया जाता है जब क्लास को तीन बार ऊपर और नीचे से लाया जाता है तो यह ब्लॉक और खाने के बचे अंश को हटा सकता है सिरों पर ब्रिस्टलेस या प्लास्टिक उभरा वाले ऐसे कई छोटे टूथपिक जैसे डिवाइस होते हैं जिनका उपयोग दांतों के बीच सफाई के लिए किया जाता है यह डिवाइस कारगर होते हैं लेकिन इनका उपयोग केवल तभी किया जा सकता है जब दांतों के बीच भरपूर जगह हो ताकि इन्हें एडजस्ट किया जा सके वह कई साइज और शॉप में आते हैं और अलग-अलग टूथपेस्ट या रेंज के साथ में या बगैर उपयोग किया जा सकते हैं वाटर फ्लैशिंग उपकरण उन रोगियों के लिए मददगार साबित हो सकते हैं जिन्हें दांतों में फिलसिंग करने में कठिनाइयां होती है इस प्रकार के उपकरणों को सहायक माना जाता है लेकिन यह पारंपरिक डेंटल फ्लॉस की जगह नहीं ले सकते ।

आहार ( nutration )

हालांकि सभी कार्बोहाइड्रेट कुछ हद तक दांतों की सडन का कारण बन सकते हैं लेकिन उसमें सबसे अहम भूमिका चीनी की है टेबल शुगर या शहद और दूध में मौजूद शुगर के साथ-साथ सभी सिंपल शुगर दांतों पर एक जैसा असर डालते हैं जब भी चीनी पालक के संपर्क में आती है तो पलक में मौजूदबैक्टीरिया एसिड बनाते हैं क्योंकि यह ज्यादा मायने रखता है कि चीनी दांतों के संपर्क में कितनी देर तक रही इसीलिए आप कितनी चीनी खाते हैं इसकी तुलना में यह ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है कि आप कितनी बार चीनी खाते हैं इसीलिए 5 मिनट में कैंडी बार खो जाने की तुलना में 1 घंटे तक ज्यादा मीठा कोल्ड ड्रिंक पीना ज्यादा नुकसान दे सकता है भले ही कैंडी बार में उससे ज्यादा चीनी मौजूद हो जो नवजात बोतल के साथ बिस्तर पर जाते हैं भले ही इस बोतल में केवल दूध हो या फार्मूला उन्हें भी कैविटी का खतरा होता है सोते समय पीने वाली बोतलों में केवल पानी होना चाहिए ।

मंजन  (दातुन ) ( colgate

हमें एक अच्छे टूथपेस्ट की आवश्यकता होती है जो हमारे दांत तो के लिए लाभदायक हो हमें इसे टूथब्रश से टूथब्रश करना चाहिए । और यदि आपको नीम की टहनी मिल जाती है तो उसके अनेकों लाभ होते हैं जो व्यक्ति नीम की टहनी या दातुन से रोजाना मंजन (कोलगेट ) करता है उसे यह कैविटी की समस्या नहीं होती मंजन ( टहनी )जब हम इसे शुरुआत में करते हैं तो यह अत्यधिक कड़वी लगती है लेकिन इसके अनेको लाभ है जब हम लगातार कुछ समय करते रहते हैं तो फिर यह हमें कड़वी नहीं लगती । यदि आपको नीम का पेड़ मिलता है तो उसे एक छोटी सी टहनी तोड़कर यदि इससे मंजन किया जाए तो यह दांतों के लिए अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होगा ।



 

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